मेरी माँ......❤️
मेरी माँ......❤️
दुनियादारी सीखने लगा हूं,
जबसे तेरी उंगली पकड़कर चलने लगा हूं,
मां मैं भी तेरे रंग में ढलने लगा हूं,
क्रिकेट छोड़, तेरे साथ serials देखने लगा हूं..🤭
मेरे एबो पे भी पर्दा डाले तू
मेरे लिए पापा को भी मना ले तू
उतरा चेहरा देख पूछती बेटा क्या बात है,
सारी उदासी उतर जाती, जब मां फेरती सिर पे हाथ है,
चोट मुझे लगती पर दर्द तुम्हें होता है,
मां तूने ही तो सिखाया प्यार क्या होता है,
डांट देती मुझे पर उसके पीछे भी प्यार छुपा होता है,
प्रयास तो करती है तू मुझे रोकने का
अलग ही सुकून मिलता है तेरे पल्लू से मुंह पोछने का..❣️
..........✍️ Saurabh Yadav 😇
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